अध्याय 145

कमरा बिल्कुल शांत था, बस उनकी बराबर चलती साँसों की धीमी आवाज़ ही सुनाई दे रही थी।

सेड्रिक ने आख़िरी दस्तावेज़—जिस पर उसके दस्तख़त बाकी थे—नीचे रखा और धड़कती कनपटियों को मलने लगा। उसकी नज़र आदतन कोने वाली मेज़ की तरफ़ चली गई, मगर वहाँ इंसान की जगह बस खुली फाइलों का ढेर पड़ा था।

वह उठकर बड़ी मेज़ के...

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